रमजान की भीड़ में इंसानियत की मिसाल, पुलिस की सजगता से लौटी गरीब की मुस्कान
संपादक – शैलेश श्रीवास्तव
गोरखपुर – रमजान के पवित्र महीने में जहां बाजारों में रौनक और भीड़ अपने चरम पर थी, वहीं इस भीड़ के बीच इंसानियत की एक ऐसी मिसाल सामने आई जिसने न सिर्फ एक खोया हुआ मोबाइल लौटाया, बल्कि एक गरीब मजदूर का भरोसा भी वापस दिला दिया शहर के रेती चौराहा, घंटाघर और मदीना मस्जिद क्षेत्र में इन दिनों भारी भीड़ और खरीदारी का माहौल है। इसी अफरातफरी के बीच एक मजदूर युवक बजरंगी का मोबाइल कहीं गिर गया। यह मोबाइल उसके लिए सिर्फ एक उपकरण नहीं, बल्कि उसकी रोज़ी-रोटी और संपर्क का एकमात्र सहारा था गश्त के दौरान पुलिस की नजर, शुरू हुई तलाश रेती चौराहे पर गश्त कर रहे रहमत नगर चौकी के सेकंड अफसर एसआई आशुतोष वर्मा की नजर जब सड़क पर पड़े मोबाइल पर पड़ी, तो उन्होंने इसे एक सामान्य वस्तु मानकर नजरअंदाज नहीं किया मोबाइल बंद था और किसी से संपर्क संभव नहीं था, लेकिन पुलिस टीम ने हार नहीं मानी। पास की दुकान पर मोबाइल चार्ज कराया गया और उसके असली मालिक तक पहुंचने की कोशिश शुरू की गई एक कॉल ने बदल दी किस्मत उधर, मोबाइल खोने के बाद बजरंगी परेशान होकर चौकी की ओर जा रहा था। तभी उसके पास सूचना पहुंची कि एक मोबाइल मिला है, जो शायद उसका हो सकता है यह सूचना चौकी प्रभारी रोहित साहू द्वारा दी गई। यह सुनते ही युवक के अंदर उम्मीद की किरण जाग उठी और वह तेजी से रेती चौराहे की ओर दौड़ा जब लौटा मोबाइल, लौट आई जिंदगी पहचान और सत्यापन के बाद जैसे ही मोबाइल युवक के हाथों में वापस आया, उसकी आंखों में खुशी और राहत साफ झलक रही थी कंपकंपाती आवाज़ में उसने कहा आज मुझे सिर्फ मेरा मोबाइल नहीं मिला, बल्कि यह भरोसा भी मिला कि दुनिया में अभी भी अच्छे लोग हैं पुलिस के प्रति बढ़ा विश्वास मोबाइल मिलने के बाद युवक ने पूरी पुलिस टीम का आभार व्यक्त किया। उसने कहा कि ऐसी ईमानदार और सजग पुलिस ही आम जनता के दिलों में सुरक्षा और विश्वास की भावना को मजबूत करती है इंसानियत की जीत पुलिस की संवेदनशीलता यह घटना सिर्फ एक खोए हुए मोबाइल की वापसी नहीं, बल्कि उस विश्वास की वापसी है जो अक्सर भीड़ में कहीं खो जाता है गोरखपुर पुलिस ने यह साबित कर दिया कि वर्दी सिर्फ कानून का प्रतीक नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और इंसानियत का चेहरा भी है।
