गोरखपुर में शहीदों को श्रद्धांजलि, “प्राणोत्सर्ग से भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु बने कालजयी

संपादक- शैलेश श्रीवास्तव

गोरखपुर – अमर शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को उनकी शहादत दिवस पर गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के सभागार में भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर एसोसिएशन के अध्यक्ष रत्नाकर सिंह ने कहा कि देशहित में इन महान क्रांतिकारियों द्वारा किया गया प्राणोत्सर्ग उन्हें सदैव के लिए कालजयी बना गया उन्होंने कहा कि 30 अक्टूबर 1928 को साइमन कमीशन के विरोध के दौरान लाला लाजपत राय पर हुए लाठीचार्ज और 17 नवंबर 1928 को उनकी मृत्यु ने पूरे देश में आक्रोश की लहर पैदा कर दी थी। इसी का बदला लेने के लिए 17 दिसंबर 1928 को भगत सिंह और राजगुरु ने अंग्रेज अधिकारी सांडर्स की हत्या कर दी, जबकि चंद्रशेखर आजाद ने उनका पीछा कर रहे सिपाही चन्नन सिंह को मार गिराया रत्नाकर सिंह ने बताया कि महज 22 वर्ष की आयु में भगत सिंह के अदम्य साहस ने देश के युवाओं में क्रांति की नई चेतना जगाई उन्होंने दिल्ली की केंद्रीय विधानसभा में बम फेंककर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज बुलंद की और जानबूझकर गिरफ्तारी दी, ताकि देश के युवाओं को जागृत किया जा सके। जेल में भी उन्होंने कैदियों के अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए आमरण अनशन किया उन्होंने यह भी कहा कि जनाक्रोश के भय से अंग्रेज सरकार ने नियमों के विपरीत 23 मार्च 1931 की शाम को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दे दी। उनके बलिदान ने उन्हें अमर बना दिया और “इंकलाब जिंदाबाद” का नारा आज भी देश में क्रांति और विरोध का प्रतीक है कार्यक्रम का संचालन मृत्युंजय नवल ने किया इस दौरान पंकज श्रीवास्तव, मनोज श्रीवास्तव, गणेश अंकज द्विवेदी, अरुण सिंह, उमेश मिश्रा, विनोद सिंह और महेंद्र गौड़ सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए इस अवसर पर सत्येंद्र शर्मा, मोहम्मद यूसुफ, अजय गुप्ता, अजीत यादव, राधेश्याम प्रजापति, नीरज सिंह, विष्णु पांडे, प्रवीण मद्धेशिया, कनक हरि अग्रवाल, कृष्ण कुमार श्रीवास्तव, आनंद श्रीवास्तव, सुभाष गुप्ता, राकेश गौड़ समेत बड़ी संख्या में लोगों ने उपस्थित होकर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए और दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी।

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