बस्ती में गूंजा शहादत का सम्मान: क्रांतिकारियों को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि, ‘23 मार्च की वो रात’ ने किया भावुक

संपादक- शैलेश श्रीवास्तव

बस्ती – शहीदी दिवस के पावन अवसर पर जनपद बस्ती के महुआ डाबर संग्रहालय में एक भावपूर्ण स्मृति समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें देश के महान क्रांतिकारी भगत सिंह, सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु के 95वें शहादत दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई कार्यक्रम की शुरुआत सभागार में उपस्थित गणमान्य लोगों द्वारा शहीद-ए-आजम भगत सिंह के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई इस अवसर पर राम शंकर निराला, राम लौट, फकीर मोहम्मद खान, रामकेश गौतम और नासिर खान सहित कई बुद्धिजीवियों और समाजसेवियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। वक्ताओं ने अपने संबोधन में क्रांतिकारियों के त्याग, बलिदान और अदम्य देशभक्ति का उल्लेख करते हुए युवाओं से उनके आदर्शों को जीवन में उतारने का आह्वान किया कार्यक्रम का विशेष आकर्षण डॉ. शाह आलम राना द्वारा प्रस्तुत ‘23 मार्च की वो रात’ शीर्षक से मंचन रहा। इस नाट्य प्रस्तुति में 23 मार्च 1931 की उस ऐतिहासिक रात का जीवंत चित्रण किया गया, जब लाहौर सेंट्रल जेल में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने हंसते-हंसते मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। मंचन के दौरान महुआ डाबर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और स्वतंत्रता संग्राम में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिसने दर्शकों को भावुक कर दिया कार्यक्रम के समापन के उपरांत उपस्थित लोगों ने महुआ डाबर संग्रहालय में संरक्षित ऐतिहासिक धरोहरों और विरासतों का अवलोकन किया। संचालन की जिम्मेदारी दिलशाद मास्टर ने कुशलता से निभाई इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, युवा और ग्रामवासी उपस्थित रहे। हैदर, फैजान, परवेज, नूर मोहम्मद, बबलू सहित अन्य ग्रामीणों ने भी शहीदों को पुष्प अर्पित कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए कार्यक्रम ने न केवल शहीदों की स्मृतियों को जीवंत किया, बल्कि उपस्थित जनसमूह में देशभक्ति और राष्ट्रसेवा की भावना को भी प्रबल

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